|| अंगूर खाने के फायदे ! ||

 



☆ अंगूर के औषधीय गुण : 1. पके अंगूर : पके अंगूर दस्त पर, शीतल, आंखों के लिए हितकारी, पुष्टिकारक, पाक या रस में मधुर, स्वर को उत्तम करने वाला, कसैला, मल तथा मूत्र को निकालने वाला, वीर्यवर्धक (धातु को बढ़ाने वाला), पौष्टिक, कफकारक और रुचिकारक है।

यह प्यास, बुखार, दमा, खांसी , वात, वातरक्त (रक्तदोष), कामला (पीलिया), मूत्रकृच्छ्र (पेशाब करने में कठिनाई होना), रक्तपित्त (खूनी पित्त), मोह, दाह (जलन), सूजन तथा डायबिटीज को नष्ट करने वाला है।

2. कच्चा अंगूर : कच्चे अंगूर गुणों में हीन, भारी, कफपित्त और रक्तपित्त नाशक है।


3. काली दाख या गोल मुनक्का : यह वीर्यवर्धक, भारी और कफ पित्त नाशक है।

4. ताजा अंगूर : रुधिर को पतला करने वाले छाती के रोगों में लाभ पहुंचाने वाले बहुत जल्दी पचने वाले रक्तशोधक तथा खून बढ़ाने वाले होते हैं।


5. किशमिश : बिना बीज की छोटी किशमिश मधुर, शीतल, वीर्यवर्धक (धातु को बढ़ाने वाला), रूचिप्रद (भूख जगाने वाला) खट्टी तथा श्वास, खांसी, बुखार, हृदय की पीड़ा, रक्त पित्त, स्वर भेद, प्यास, वात, पित्त और मुख के कड़वेपन को दूर करती है।


☆ अंगूर के फायदे व और उपयोग : • बल एवं पुष्टि के लिए : मुनक्का 12 पीस, छुहारा 5 पीस तथा मखाना 7 पीस, इन सभी को 250 मिलीलीटर दूध में डालकर खीर बनाकर सेवन करने से खून और मांस की वृद्धि होकर शरीर पुष्ट होता है।


• जलन (दाह), प्यास : 10-20 नग मुनक्का शाम को पानी में भिगोकर सुबह मसलकर छान लें और उसमें थोड़ा सफेद जीरे का चूर्ण और मिश्री या चीनी मिलाकर पिलाने से पित्त के कारण उत्पन्न जलन शांत होती है।


• पित्त ज्वर : काला अंगूर और अमलतास के गूदे का 40- 60 मिलीलीटर काढ़ा सुबह-शाम पिलाने से पित्त ज्वर ठीक हो जाता है। • रक्तपित्त : किशमिश 10 ग्राम, दूध 160 मिलीलीटर, पानी 640 मिलीलीटर तीनों को हल्की आंच पर पकावें। 160 मिलीलीटर शेष रहने पर थोड़ी मिश्री मिलाकर पिलाएं।


• त्वचा के रोग : बसन्त के सीजन में इसकी काटी हुई टहनियों में से एक प्रकार का रस निकलता है जो त्वचा सम्बंधी रोगों में बहुत लाभकारी है।

• धतूरे का जहर : अंगूर का रस 10 मिलीलीटर, सिरका 100 मिलीलीटर दूध में मिलाकर कई बार पिलायें।


• हरताल के जहर पर : रोगी को उल्टी कराकर किशमिश 10-20 ग्राम, 250 मिलीलीटर दूध में पकाकर पिलायें।

• नशे की आदत : सिगरेट, चाय, काफी, जर्दा, शराब आदि की आदत केवल अंगूर खाते रहने से छूट जाती है।


• बार-बार पेशाब आना : बार-बार पेशाब जाना मूत्राशय (वह स्थान जहां पेशाब एकत्रित होता हैं) के लिए अच्छा नही हैं। अंगूर खाने से बार-बार पेशाब जाने की आदत कम होती है।


• गुर्दे का दर्द : अंगूर की बेल के 30 ग्राम पत्तों को पीसकर पानी मिलाकर व छानकर और नमक मिलाकर पीने से गुर्दे के दर्द से तड़पते रोगी को आराम मिलेगा।

• अनियमित मासिक-धर्म, श्वेतप्रदर : 100 ग्राम अंगूर रोज खाते रहने से मासिक-धर्म नियमित रूप से आता है। इससे स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।


• गठिया : अंगूर शरीर से उन लवणों को निकाल देता है, जिनके कारण गठिया शरीर में बनी रहती है। गठिया की परिस्थितियों को साफ करने के लिए सुबह समय अंगूर खाते रहना चाहिए।

• चेचक : अंगूर गर्म पानी में धोकर खाने से चेचक में लाभ होता है।


मिरगी : मिरगीग्रस्त रोगियों को अंगूर खाना लाभकारी होता है।

• माइग्रेन : अंगूर का रस आधा कप नित्य सुबह (सूरज उगने से पहले) पीने से आधे सिर का दर्द जो सूर्य निकलने के साथ प्रारम्भ होकर सूर्य के साथ-साथ बढ़ता है, ठीक हो जाता है।


• पेट की गैस और जलन में : अंगूर के रस का नियमित सेवन करने से पेट की जलन, गैस की तकलीफ शांत होती है तथा पाचन में सुधार होता है।

• पाचनयुक्त : अंगूर में 50 प्रतिशत तक शर्करा पाई जाती है जोकि परिपक्व होती है। इस शर्करा का शरीर में शोशण आसानी से हो जाता है।


• बवासीर : प्रतिदिन अंगूर खाने से कब्ज दूर होती है, बवासीर में भी लाभ मिलता है।

• अतिसार (दस्त) : अंगूर के रसपान से अतिसार (दस्त) में भी फायदा होता है।


• सिर में दर्द : 8-10 मुनक्का, 10 ग्राम मिश्री तथा 10 ग्राम मुलेठी तीनों को पीसकर नस्य देने से पित्त के विकार के कारण उत्पन्न सिर का दर्द दूर होता है।

• मुंह के रोग : मुनक्का 10 दाने और 3-4 जामुन के पत्ते मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े से कुल्ला करने से मुंह के रोग मिटते हैं।


• खून की कमी : 100 मिलीलीटर अंगूर का जूस (रस) पीने से शरीर में खून की कमी दूर हो जाती है।

• अम्लपित्त : मुनक्का 10 ग्राम और सौंफ आधी मात्रा में दोनों को 100 मिलीलीटर पानी में भिगों दें। सुबह मसलकर और छानकर पीने से अम्लपित्त में लाभ होता है।


• अंडकोषवृद्धि : अंगूर के 5-6 पत्तों पर घी चुपड़कर तथा आग पर खूब गर्मकर बांधने से फोतों की सूजन बिखर जाती है।

• फेफड़ों के रोग : फेफड़ों के सभी प्रकार के रोग- यक्ष्मा, खांसी, जुकाम तथा दमा आदि के लिए अंगूर बहुत ही अच्छे होते हैं।


• कब्ज : खाना खाने के बाद लगभग 200 ग्राम अंगूर को खाने से पेट में बनी कब्ज मिट जाती है।

• वमन (उल्टी) : अंगूर का रस चूसने से जलन और उल्टी आने के रोग में आराम आ जाता है।

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